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प्रारंभिक लघुचित्र– पाल शैली एवं अपभ्रंश शैली | Pala Style And Apabhramsa Style

(216)     

सूक्ष्म विवरणों वाले छोटे चित्र, लघुचित्र कहलाते हैं। Small pictures with fine details are called miniatures.

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चित्रकला– रावण छाया, लेपाक्षी, जोगीमाथा, बादामी | Indian Paintings

(213)     

रावण छाया शैल आश्रय उड़ीसा के क्योंझर जिले में स्थित हैं। Badami Cave is located in Karnataka.

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चित्रकला– ऐलोरा, बाघ, अर्मामलई, चित्तानवासल | Painting– Ellora, Bagh, Armamalai, Chittanvasal

(208)     

बाघ की गुफाएँ मध्य प्रदेश में स्थित हैं। Baagh Caves are located in Madhya Pradesh.

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अजंता गुफाओं की चित्रकला (एवं जातक कथाएँ) | Painting of Ajanta Caves (and Jataka tales)

(204)     

अजंता में 29 गुफाओं का समूह है। Ajanta has a group of 29 caves.

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भित्ति चित्रकला एवं लघु चित्रकला | Mural Painting & Miniature Painting

(203)     

भारतीय चित्रकला को मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है। Indian painting can be mainly classified into two parts.

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प्रागैतिहासिक चित्रकला (पाषाण काल की चित्रकला) | Prehistoric Painting (Stone Age Painting)

(202)     

प्रागैतिहासिक चित्रकला सामान्यतः चट्टानों पर की गई थी। Prehistoric painting was usually done on rocks.

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भीमबेटका शैल चित्रकलाएँ | Bhimbetka Rock Paintings

(190)     

भीमबेटका भोपाल के दक्षिण में मध्यप्रदेश की विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित है। Bhimbetka is situated in the Vindhya mountain ranges of Madhya Pradesh, south of Bhopal.

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भारतीय चित्रकलाएँ– परिचय, सिद्धांत, शैलियाँ | Indian Paintings– Introduction, Principles, Styles

(176)     

हमारे भारतवर्ष में कलात्मक उत्कृष्टता की सुदीर्घ परंपरा रही है। Our India has a long tradition of artistic excellence.

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स्वातंत्र्योत्तर वास्तुकला― लॉरी बेकर और चार्ल्स कोरिया | Post-Independence Architecture― Laurie Baker and Charles Correa

(129)     

लॉरी बेकर और चार्ल्स कोरिया ने स्वातंत्रयोत्तर वास्तुकला में सराहनीय योगदान दिया। Laurie Baker and Charles Correa made commendable contributions to post-independence architecture.

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इंडो-गॉथिक शैली और नव रोमन शैली | Indo-Gothic Style and Neo Roman Style

(127)     

अंग्रेज अपने साथ वास्तुकला की गॉथिक शैली लाए और उन्होंने नव-रोमन शैली को विकसित किया। The British brought with them the Gothic style of architecture and they developed the Neo-Roman style.

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भारतवर्ष में आधुनिक वास्तुकला― पुर्तगाली प्रभाव और फ्रांसीसी प्रभाव | Modern Architecture in India― Portuguese Influence and French Influence

(125)     

यूरोपियाई अपने साथ वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य कला का खजाना भी साथ लाए। Europeans also brought with them a wealth of architecture and architecture.

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भारतवर्ष के महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर एवं उनकी विशेषताएँ | Important Sun Temples of India and their Features

(122)     

भारतवर्ष में सूर्य को एक खगोलीय पिण्ड के रूप में वैदिक काल से ही पूजा जाता है। इसकी हिन्दु धर्म में आदित्य या सूर्य के रूप में पूजा की जाती है।

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भारतवर्ष में पारसी समुदाय के महत्वपूर्ण मंदिर |Important Temples of Parsi Community in India

(120)     

पारसी विचारधारा में तीन प्रकार के अग्नि मंदिर होते हैं। पहला अतश बेहरम या बेहराम अर्थात् विजय की अग्नि, दूसरा अत्श अदरान या एड्रियन और तीसरा अतश दद्‌गाह या दर-ए-मेहर है।

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इस्लामी शासन के अंतर्गत कश्मीरी वास्तुकला का विकास | Development of Kashmiri Architecture under Islamic Rule

(118)     

मुस्लिम शासन की स्थापना ने तत्कालीन कश्मीरी शैली और इस्लामी संवेदनाओं के मिश्रण को जन्म दिया। इस मिश्रित शैली की अनूठी विशेषताएँ थीं।

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हिन्दु शासकों द्वारा विकसित कश्मीरी वास्तुकला | Kashmiri Architecture Developed by Hindu Rulers

(117)     

कश्मीर पर शासन करने वाले हिंदू शासकों ने कुछ अनूठे वास्तुशिल्पों का विकास करवाया। उनके द्वारा अनेक उत्कृष्ट मंदिर निर्मित करवाये गये।

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कश्मीर की वास्तुकला एवं इसकी विशेषताएँ | Kashmir's Architecture and Its Characteristics

(116)     

कश्मीर में वास्तुकला- कश्मीर की वास्तुकला को यहाँ के शासनकाल के अनुसार मुख्य रूप से दो चरणों में विभक्त किया जा सकता है- 1. हिन्दु चरण 2. मुस्लिम चरण।

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वास्तुकला की राजपूत शैली व शिख शैली तथा अवध वास्तुकला | Rajput Style and Sikh Style of Architecture and Awadh Architecture

(114)     

मुगल काल के दौरान राजपूत शैली का विकास राजिस्थान और शिख शैली का विकास पंजाब में हुआ। ये दोनों ही शैलियाँ भारतवर्ष की प्राचीन एवं हिन्दु संस्कृति से संबद्ध हैं।

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मुगल वास्तुकला― जहाँगीर, शाहजहाँ (ताजमहल), औरंगजेब | Mughal Architecture― Jahangir, Shah Jahan (Taj Mahal), Aurangzeb

(111)     

जहाँगीर के शासनकाल के दौरान वास्तुकला को कोई विशेष महत्व प्राप्त नहीं हुआ। इसके उत्तराधिकारी शाहजहाँ के शासनकाल में मुगल वास्तुकला विकास के चरमोत्कर्ष पर पहुँच गयी। इसके बाद औरंगजेब के शासनकाल में वास्तुकला की अवनति हुई।

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मुगल सम्राट अकबर द्वारा निर्मित करवाये गये महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प | Important architectures built by the Mughal Emperor Akbar

(110)     

सम्राट अकबर का शासनकाल मुगल कला एवं वास्तुकला का स्वर्ण युग माना जाता है। अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान कला एवं स्थापत्य कला के विकास में गहरी रूचि ली।

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मुगल वास्तुकला- बाबर, हुमायूँ और शेरशाह सूरी | Mughal Architecture- Babur, Humayun and Sher Shah Suri

(109)     

मुगल शासक कला एवं स्थापत्य कला के महान संरक्षक थे। उनके शासनकाल के दौरान भारतवर्ष के महत्वपूर्ण वास्तुशिल्पों का निर्माण किया गया।

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भारतीय कला- बंगाल शैली, जौनपुर शैली, मालवा शैली और बीजापुर शैली | Bengal style, Jaunpur style, Malwa style and Bijapur style

(108)     

मध्यकाल की अवधि के दौरान बंगाल, बीजापुर, जौनपुर और मांडू वास्तुकला के विकास के महत्वपूर्ण केन्द्र बन गए।

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दिल्ली सल्तनत काल के दौरान वास्तुकला- साम्राज्यिक शैली | Architecture during the Delhi Sultanate period- Imperial style

(103)     

दिल्ली सल्तनत काल के दौरान वास्तुकला- दिल्ली सल्तनत काल यानी 1206 ईस्वी से 1526 ईस्वी के दौरान वास्तुकला को दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

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मध्यकालीन भारत में वास्तुकला- इंडो इस्लामिक (भारतीय-अरबी) शैली | Architecture in Medieval India- Indo Islamic Style

(97)     

12वीं शताब्दी ईसवी तक दिल्ली पर एक इस्लामिक शासक ने अधिकार कर लिया। इसने भारतीय इतिहास में मध्यकाल का श्रीगणेश किया। आगामी वर्षों में भारतीय वास्तुकला में व्यापक परिवर्तन हुए।

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भारत के महत्वपूर्ण जैन तीर्थस्थल | Important Jain pilgrimage sites in India

(95)     

भारत के महत्वपूर्ण जैन तीर्थस्थलों में पालिताना मंदिर, शिखरजी, गिरनार मंदिर, पावापुरी, दिलवाड़ा मंदिर, श्रवणबेलगोला, शांतिनाथ मंदिर आदि प्रमुख हैं।

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भारतवर्ष के महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थल | Important Buddhist pilgrimage sites of India

(94)     

महाबोधि मंदिर, बोधगया , नालंदा, विक्रमशिला, सोमपुरा, ओदंतपुरी, पुष्पगिरी और जगद्दल के महाविहार, छत्तीसगढ़ में सिरपुर, ओडिशा में ललितगिरी आदि प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल हैं।

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भारत से बाहर विदेशों में स्थित प्रमुख मंदिर | Major temples located abroad outside India

(92)     

भारत के बाहर विदेशों में स्थित प्रमुख मंदिर निम्नलिखित हैं- अंगकोरवाट मंदिर, कंबोडिया, प्रमबनन मंदिर, जावा-इंडोनेशिया, पशुपतिनाथ मंदिर, काठमाण्डू, नेपाल...

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Part- 2. भगवान शिव और विष्णु को समर्पित भारत के हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण मंदिर || List of Important Hindu Temples in India

(91)     

2. भगवान शिव और विष्णु को समर्पित भारत के हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण मंदिरों का विवरण यहाँ दिया गया है।

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Part- 1. भगवान शिव और विष्णु को समर्पित भारत के हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण मंदिर | List of Important Hindu Temples in India

(89)     

भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित भारत के हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण मंदिरों का विवरण यहाँ दिया गया है।

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भगवान शिव को समर्पित भारत के 12 ज्योतिर्लिंग | 12 Jyotirlingas of India dedicated to Lord Shiva

(88)     

भगवान शिव को समर्पित भारत के 12 ज्योतिर्लिंग– सोमनाथ मंदिर, नागेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर आदि हैं।

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प्राचीन भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय- तक्षशिला, नालंदा, कांचीपुरम || Taxila, Nalanda, Kanchipuram Universities

(86)     

भारत का प्राचीन इतिहास गौरवशाली रहा है। शिक्षण व्यवस्था उत्तम थी। जिसमें प्राचीन भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय- तक्षशिला, नालंदा, कांचीपुरम थे।

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बंगाल की वास्तुकला- पाल एवं सेन शैली | Architecture of Bengal- Pala and Sen style

(84)     

बंगाल क्षेत्र में विकसित वास्तुशिल्प कला को पाल एवं सेन वास्तुशिल्प शैली के नाम से जाना जाता है।

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दक्षिण भारत की वास्तुकला- नायक, वेसर, विजयनगर (बादामी गुफा मंदिर) और होयसाल शैली | Architecture of South India

(80)     

16 वीं से 18 वीं शताब्दी के मध्य नायक शासकों के संरक्षण में मंदिर वास्तुकला की नायक शैली विकसित हुई

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दक्षिण भारत की द्रविड़ शैली एवं चोल वास्तुकला व मूर्तिकला (नटराज की मूर्ति) | Dravidian style and Chola architecture and sculpture of South India (Statue of Nataraja)

(79)     

दक्षिण भारत में अपने शासनकाल में चोल शासकों ने सैकड़ों मंदिरों का निर्माण करवाया। मंदिर वास्तुकला की इस शैली को द्रविड़ शैली या चोल वास्तुकला के नाम से जाना जाता है।

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दक्षिण भारत की वास्तुकला- महाबलीपुरम की वास्तुकला | Architecture of South India- Architecture of Mahabalipuram

(71)     

दक्षिण भारत में भी एक विशिष्ट शैली विकसित हुई। पल्लव शासक महेन्द्रवर्मन की देख-रेख में मंदिर वास्तुकला प्रारंभ हुई।

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उत्तर भारत की वास्तुकला की नागर शैली- ओडिशा, खजुराहो और सोलंकी शैली | Architecture of North India

(70)     

पाँचवी शताब्दी ईसवी में भारत के उत्तरी भाग में मंदिर वास्तुकला की एक भिन्न शैली का प्रादुर्भाव हुआ, जिसे वास्तुकला की नागर शैली के नाम से जाना जाता है।

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प्राचीन भारत में मंदिर वास्तुकला की प्रमुख शैलियाँ | Major Styles of Temple Architecture in Ancient India

(65)     

प्राचीन भारत में मंदिर वास्तुकला की प्रमुख शैलियों का समृद्ध इतिहास रहा है, जो आज भी दर्शकों को आश्चर्य चकित कर देती हैं।

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गुप्त काल में मंदिर वास्तुकला के विकास के चरण | Stages of Development of Temple Architecture in the Gupta Period

(62)     

मंदिर वास्तुकला- वर्गाकार गर्भगृह एवं खंबों से युक्त द्वारमण्डप के विकास के साथ गुप्त काल में मंदिरों की वास्तुकला का प्रादुर्भाव हुआ।

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प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण अभिलेख, शिलालेख, स्तंभलेख एवं लेख | Important Records, Rock Inscriptions, Pillar Inscriptions and Inscriptions of Ancient India

(61)     

अशोक के अभिलेख, अशोक के स्तंभों के साथ-साथ शिलालेख और गुफा भित्तियों पर लेख सहित कुल 33 अभिलेखों का समूह है।

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गुप्त कालीन वास्तुकला- गुफाएँ, चित्रकारी, स्तूप और मूर्तियाँ | Gupta Architecture- Caves, Paintings, Stupas and Sculptures

(58)     

गुप्त काल- चौथी शताब्दी ईसवी में गुप्त साम्राज्य के आविर्भाव को बहुधा 'भारत का स्वर्णिम युग' कहा जाता है।

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हिन्दू मंदिरों के महत्वपूर्ण अवयव- गर्भगृह, मंडप, शिखर, वाहन | Hindu Temples– Sanctum sanctorum, Pavilion, Peak, Vehicle

(57)     

हिन्दू मंदिरों के मूल रूप में निम्नलिखित अवयव सम्मिलित रहते हैं- 1. गर्भगृह 2. मंडप 3. शिखर 4. वाहन

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शरीर की विभिन्न मुद्राएँ - महात्मा बुद्ध से संबंधित | Various body postures related to Mahatma Buddha

(54)     

बुद्ध प्रतिमाओं का सृजन विभिन्न मुद्राओं का आधार बनाकर किया गया है। यहाँ महात्मा बुद्ध की शारीरिक प्रमुख मुद्राएँ इस प्रकार हैं।

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यूनानी कला एवं रोमन मूर्ति-कला |Greek art and Roman sculpture

(40)     

यूनानी तथा रोमन शैली के मध्य कुछ अंतर है। गांधार शैली इन दोनों शैलियों का एकीकरण करती है।

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मूर्तिकला शैली - गांधार, मथुरा तथा अमरावती शैलियों में अंतर | Sculptural style – Difference between Gandhara, Mathura and Amravati styles

(38)     

गांधार शैली में यूनानी अथवा हेलेनिस्टिक मूर्तिकला का विशेष प्रभाव था, इसलिए इसे 'भारतीय-यूनानी कला' कहा जाता है।

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मौर्योत्तर कालीन मूर्तिकला- गांधार, मथुरा और अमरावती शैली | Post-Mauryan Sculpture – Gandhara, Mathura and Amravati Style

(36)     

मौर्योत्तर कालीन मूर्तिकला- तत्कालीन समय में मूर्तिकला की तीन शैलियों- गांधार, मथुरा और अमरावती का विकास तीन अलग-अलग स्थानों पर हुआ।

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मौर्योत्तर काल की स्थापत्य कला- गुफाएँ एवं स्तूप | Architecture of the post-Mauryan period - caves and stupas

(34)     

मौर्योत्तर कालीन स्थापत्य कला के तत्कालीन समय में गुफाएँ दो भागों चैत्य और विहार में विभाजित थीं।

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मौर्योत्तर कालीन कला | Post-Mauryan Art

(32)     

मौर्योत्तर काल में मूर्तिकला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई। मूर्तिकला की विभिन्न शैलियों का विकास हुआ। तत्कालीन समय में शैव, वैष्णव और शाक्त जैसे ब्राह्मण संप्रदायों का उद्भव हुआ।

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मौर्य काल की लोकप्रिय कला | Popular Art of the Mauryan Period

(30)     

मौर्य काल की इन गुफाओं को पत्थर काटकर निर्मित किया जाता था। इन गुफाओं का प्रयोग बौद्ध भिक्षु विहार या निवास स्थल के रूप में करते थे।

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मौर्य काल की दरबारी कला | Court Art of the Mauryan Period

(29)     

मौर्य शासकों ने राजनीतिक के साथ-साथ धार्मिक कारणों से भी दरबारी कला एवं स्थापत्य कार्यों का शुभारंभ किया, जिसे दरबारी कला के नाम से जाना जाता है।

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मौर्य कालीन कला - स्थापत्य कला | Mauryan Art - Architecture

(27)     

मौर्य साम्राज्य स्थापित होने के साथ ही राज्य का संरक्षण प्राप्त कला एवं व्यक्तिगत कला की स्थापत्य कला एवं मूर्तिकला में स्पष्ट सीमांकन देखा गया।

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हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त मृद्भाण्ड एवं आभूषण | Pottery and Jewelery from Harappan Civilization

(22)     

हड़प्पा सभ्यता के पुरास्थलों से मुख्य रूप से दो प्रकार के मृद्भाण्ड प्राप्त हुए हैं- साधारण मृद्भाण्ड और चित्रित मृद्भाण्ड।

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हड़प्पा सभ्यता की मूर्तियाँ | Statues of Harappan Civilization

(20)     

हड़प्पाई मूर्तिकार त्रि-आयामी कृतियों से व्यवहार करने में बहुत कुशल थे। तत्कालीन समय में उन्होंने मोहरों, कांस्य मूर्तियों और मृद्भाण्डों का निर्माण किया है।

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हड़प्पा सभ्यता की मोहरें | Seals of Harappan Civilization

(19)     

पुरातत्वविदों को हड़प्पा के पुरास्थलों से मुख्य रूप से वर्गाकार मुहरे प्राप्त हुई हैं। वहीं त्रिकोणीय, आयताकार और वृत्ताकार मोहरों के उपयोग के साक्ष्य मिले हैं।

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हड़प्पा सभ्यता की वास्तुकला | Architecture of Harappan Civilization

(17)     

सभ्यता के स्थलों के उत्खनन से तीन प्रकार के नगर प्राप्त हुए हैं- आवास गृह, सार्वजनिक भवन, सार्वजनिक स्नानागार।

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हड़प्पा सभ्यता के स्थल एवं उनसे प्राप्त वास्तुकला एवं मूर्तिकला के उदाहरण | Harappan architecture and sculpture

(16)     

हड़प्पा सभ्यता के स्थलों के उत्खनन से प्राप्त मुहरों, मूर्तियाँ, मृद्भाण्ड और आभूषण से तत्कालीन समय की कला की स्पष्ट जानकारी मिलती है

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भारत की वास्तुकला, मूर्तिकला एवं मृद्भाण्ड | Architecture, Sculpture and Pottery of India

(14)     

वास्तुकला और मूर्तिकला से तात्पर्य वास्तुकला यानि आर्किटेक्चर लैटिन भाषा के शब्द 'ट्रैक्टन' से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ निर्माता (बिल्डर) होता है।

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