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संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार क्या होते हैं?

(432)     

नायक और नायिका के सौन्दर्य तथा प्रेम सम्बन्धी परिपक्व अवस्था फो श्रृंगार रस कहते हैं। श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति है।

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उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकार

(431)     

इस लेख में उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकारों के बारे में जानकारी दी गई है।

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अलंकार क्या है? | वक्रोक्ति, अतिशयोक्ति और अन्योक्ति अलंकार

(428)     

काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्वों या धर्मों को अलंकार कहा जाता है।

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भाषा क्या है? | भाषा की परिभाषाएँ और विशेषताएँ

(427)     

'भाषा' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'भाष' धातु से हुई है। भाष का शाब्दिक अर्थ 'बोलना' होता है।

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परिमाणवाचक, व्यक्तिवाचक और विभागवाचक विशेषण

(319)     

इस लेख में विशेषणों के बारे में जानकारी दी गई है।

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संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण

(318)     

वे विशेषण जिनसे संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध होता है, 'संख्यावाचक विशेषण' कहलाते हैं।

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गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

(309)     

इस लेख में गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण के बारे में जानकारी दी गई है।

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विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ

(307)     

वे शब्द जो संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, 'विशेषण' कहलाते हैं।

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संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?

(306)     

वे सर्वनाम शब्द जो संज्ञा व सर्वनाम शब्दों के मेल से बनते हैं, 'संयुक्त सर्वनाम' कहलाते हैं।

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सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

(303)     

इस लेख में सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम के बारे में जानकारी दी गई है।

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निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

(301)     

निश्चयवाचक सर्वनाम में निश्चयात्मकता का बोध होता है। अनिश्चयवाचक सर्वनाम में निश्चयात्मकता का बोध नहीं होता।

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निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

(299)     

निजवाचक सर्वनाम का रूप 'आप' है।

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पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष

(296)     

वे सर्वनाम शब्द, जो पुरुषों के नाम के स्थान पर आते हैं, 'पुरुषवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं।

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सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार

(293)     

वे विकारी शब्द जो पूर्वापर सम्बन्ध के आधार पर किसी संज्ञा शब्द के स्थान पर आते हैं, सर्वनाम कहलाते हैं।

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संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?

(292)     

संज्ञा से सर्वनाम बनाने के लिए संज्ञा शब्द के अन्त में त्व, पन आदि प्रत्यय लगाये जाते हैं।

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संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक

(291)     

वे विकारी शब्द जिनसे किसी विशेष वस्तु, व्यक्ति, स्थान या भाव के नाम का बोध हो, संज्ञा कहलाते हैं।

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रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण || Ras - Veer, Bhayanak, Adbhut, Shant, Karun

(107)     

रसों के वर्णन के अन्तर्गत - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है।

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अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष || Alankar- Byajstuti, Byajninda

(106)     

जब कथन में देखने और सुनने पर निन्दा सी जान पड़े किन्तु वास्तव में प्रशंसा हो, वहाँ ब्याज-स्तुति अलंकार होता है।

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काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण || Kavya gun - Oj gun, Prasad Gun, Madhurya Gun

(105)     

कविता के बाह्य स्वरूप को देखकर 'काव्य गुणों' की प्रतीति होती है। काव्य में 'माधुर्य', 'प्रसाद' और 'ओज गुण' देखे जाते हैं।

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छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया || Chhand - Chhappay, Kavitta, Savaiya

(104)     

कविता के रचना-विधान को 'छंद' कहते हैं। छंद कविता की गीतात्मकता में वृद्धि करते हैं।

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मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ || Dialects and Literature of Madhya Pradesh - Journals and Magazines

(102)     

किसी क्षेत्र विशेष में एक वर्ग या समुदाय के द्वारा बोली जाने वाली भाषा 'बोली' कहलाती है। बोली का क्षेत्र सीमित होता है और इसका साहित्य भी आंचलिक होता है।

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भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है? || Bhav-vistar ya bhav-pallavan kaise kare

(101)     

जब किसी वाक्य का भाव हम सरल शब्दों में प्रकट करते हैं तब उसे भाव-विस्तार कहते हैं।

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वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य || Vachya- Kartrivachya, Karmvachya, Bhavvachya

(100)     

वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव की प्रधानता प्रदर्शित करने हेतु जब क्रिया के अलग-अलग रूपों की सूचना मिले तो वहाँ 'वाच्य' होता है।

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अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है || Apathit Gadyansh in Hindi

(99)     

गद्यांश बिना पढ़ा हुआ हो गद्यांश हो उसे अपठित गद्यांश कहा जाता है। (गद्यांश अर्थात किसी गद्य यथा- लेख, निबंध, समाचार आदि का एक छोटा सा अंश।)

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भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है? || Boli, Vibhasha, Matribhasha

(98)     

भाषा विचारों के आदान-प्रदान और भावों की अभिव्यक्ति का साधन है। भाषा ध्वनि संकेतों का एक समूह, एक अभ्यास एक व्यवस्था है।

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अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार || Arth ke aadhar par vakyon ke prakar in hindi

(96)     

किसी वाक्य में सूचना, निषेध, संदेह की भावना, आज्ञा का बोध, विस्मय का भाव प्रस्तुत होने पर वाक्य के भिन्न-भिन्न प्रकार होते हैं।

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राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

(93)     

जब किसी भाषा को समस्त राष्ट्र की भाषा मान लिया जाता है, तब वह राष्ट्रभाषा कहलाती है।

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मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है? || Muhavare and Lokokti

(90)     

मुहावरे और लोकोक्ति के प्रयोग से भाषा में सरलता, सरसता, चमत्कार और प्रवाह उत्पन्न होता है।

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हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर) || Vakya ke prakar– Saral, Mishra and Sanyukt

(87)     

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं– सरल वाक्य, मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य

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कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण || Kundliya Chhand and its example

(85)     

कुण्डलिया छन्द में दोहा और रोला छंदों का इस प्रकार मिश्रण रहता है, मानो ये कुण्डली रूप में परस्पर गुथे हुए हैं।

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प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं? || Prabandh Kavya and Muktak Kavya kya hote hain?

(83)     

जब किसी काव्य में एक कथा का सूत्र विभिन्न छंदों के माध्यम से जुड़ा रहे तो वह प्रबंध काव्य कहलाता है।

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समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

(82)     

समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– जिन शब्दों का उच्चारण लगभग समान हो किन्तु अर्थ भिन्न-भिन्न हो, उन्हें समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द कहते हैं।

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भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार || Bhrantimaan, Sandeh and Punruktiprakash Alankar

(81)     

जहाँ किसी वस्तु में उसी के समान वस्तु का संशय हो जाए और अनिश्चय बना रहे तो वहाँ 'सन्देह अलंकार' होता है।

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अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार

(77)     

जब किसी काव्य रचना के पद (काव्यांश) में किसी सच्ची बात को छिपाकर उसके स्थान पर किसी झूठी बात या वस्तु की स्थापना कर दी जाती है वहाँ अपहनुति अलंकार होता है।

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काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है? || What is Prasad Gun in Hindi Kavya

(76)     

पाठक बड़े आसानी के साथ है काव्य के अर्थ को ग्रहण कर लेता है तब काव्य के ऐसे गुण को 'प्रसाद गुण' कहते हैं।

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घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण || Ghankshari Chhand and its examples

(72)     

ऐसा छंद जिसके एक चरण में कुल 32 वर्ण हों और 8-8 पर यति से 32 वर्ण हों तो ऐसे छन्द को घनाक्षरी छंद (Ghanakshari Chhand) कहते हैं।

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छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं? | Chhand me Matrao ki gadna kaise karte hain?

(69)     

किसी स्वर के उच्चारण में जो समय लगता है उसकी अवधि को मात्रा कहते हैं।
मात्राएँ – 'हस्व' और 'दीर्घ' होती हैं।

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रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव || Ras ke Avyav (Ang)

(68)     

रस के कुल चार अवयव (अंग) हैं – 1. स्थायीभाव 2. संचारी भाव 3. विभाव 4. अनुभाव।

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रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस || Ras kya hai?

(67)     

रस शब्द की व्युत्पत्ति 'रस्यते इति रसः', अर्थात जिससे रस की अनुभूति की जाए।

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शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति | Shbd Shakti - Abhidha, Lakshna and Vyanjana Shabd Shakti

(66)     

शब्द में अर्थ को स्पष्ट करने वाले कार्य व्यापार या साधन 'शब्द शक्ति' कहलाती है।

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पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग || Viram Chihna

(64)     

किसी भी भाषा के लेखन और उसकी बेहतर समझ के लिए विराम चिन्हों की जानकारी बहुत आवश्यक होती है।

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प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग || Prernatmak / Prernarthak kriya kya hoti hai?

(59)     

यदि क्रिया में थोड़ा सा परिवर्तन किया जाये और परिवर्तन के बाद कर्ता के द्वारा कार्य दूसरे से कराए जाने का बोध हो तब वह क्रिया प्रेरणात्मक या प्रेरणार्थक क्रिया बन जाती है।

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द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार | What is Dwirukti Shabd in Hindi

(55)     

एक ही उक्ति शब्द जब दो बार उच्चारित होती है, तो उसे द्विरुक्ति कहते हैं।

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वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम | Vakya Rachana me PADKRAM ke niyam in Hindi

(51)     

वाक्य रचना की अशुद्धियों का मुख्य कारण व्याकरण के नियमों का सही रूप में न जानना है। वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम जानना आवश्यक है।

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योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है? | Yojak Chihna hindi me

(49)     

पृथक शब्दों को जोड़ने वाले चिह्न (-) को योजक चिह्न कहते हैं। इसे सामासिक या विभाजक चिह्न भी कहते हैं।

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व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम | Vyanjan and Visarg sandhi ke niyam

(48)     

हिंदी व्याकरण में संधि प्रकरण महत्वपूर्ण है व्यंजन एवं विसर्ग संधि एवं निर्माण के नियमों के बारे में जानकारी आवश्यक है।

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संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि | Sandhi - Swar Sandhi ke prakar- Dirgh, Gun, Vridhi, Yan,Ayadi

(47)     

संधि का अर्थ जोड़ या जुड़ाव से होता है। स्वर संधि के इन प्रकारों - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि को जानना आवश्यक है।

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समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What is Samas in Hindi

(45)     

"दो या दो से अधिक शब्दों के योग से जब नया शब्द बन जाता है तब उसे सामासिक शब्द और उन शब्दों के योग को समास कहते हैं।"

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मुहावरे और लोकोक्तियाँ | Idioms and Proverbs

(44)     

मुहावरे और कहावतें सूत्र वाक्य होते हैं, जिनका अर्थ लक्ष्यार्थ होता है।

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हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द

(42)     

हिन्दी शब्द ज्ञान के अन्तर्गत पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द की जानकारी आवश्यक होती है।

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शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द

(39)     

ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समूह को शब्द कहते हैं। सामान्यतः शब्द भेद- उत्पत्ति और रचना के आधार पर किए जाते हैं।

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