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संसाधनों का वर्गीकरण– स्वामित्व और पुनः पुर्ति के आधार पर | Classification Of Resources

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स्वामित्व के आधार पर (On The Basis Of Ownership)

स्वामित्व के आधार पर संसाधनों को निम्नलिखित भागों में बाँटा जा सकता है–
1. व्यक्तिगत संसाधन– संसाधनों की इस श्रेणी के अन्तर्गत किसी व्यक्ति की सम्पत्ति, स्वास्थ्य दक्षता आदि शामिल हैं।
2. राष्ट्रीय संसाधन– किसी राष्ट्र की सम्पदा, नागरिकों की देशभक्ति, सैन्य शक्ति आदि उस देश के राष्ट्रीय संसाधन होते हैं।
3. विश्व संसाधन– मानव मात्र के कल्याण और समृद्धि के लिए उपलब्ध संसार की भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ विश्व संसाधन कहलाती हैं।

On the basis of ownership, resources can be divided into the following parts–
1. Personal Resources– This category of resources includes property, health efficiency etc. of a person.
2. National Resources– Wealth of a nation, patriotism of citizens, military power etc. are the national resources of that country.
3. World Resources– The material and non-material things of the world available for the welfare and prosperity of mankind are called world resources.

भूगोल के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़ें। (Also read these 👇 episodes of Geography.)
मानव जीवन में संसाधनों का महत्व | Importance Of Resources In Human Life

पुनः पूर्ति के आधार पर (On Replenishment Basis)

पुनः पूर्ति के आधार पर संसाधनों को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है–
1. पुनः पूर्ति योग्य संसाधन– वे संसाधन जिनका उपयोग होने पर भी उनमें लाभकारी गुण विद्यमान रहते हैं, 'पुनः पूर्ति योग्य संसाधन' कहलाते हैं। अर्थात् वे संसाधन जिनका कई बार उपयोग किया जा सके, 'पुनः पुर्ति योग्य संसाधन' कहलाते हैं। उदाहरण के लिए कृषि भूमि में एक बार खेती करने पर उसे दोबारा उसे कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
2. पुनः आपूर्तिहीन संसाधन– वे संसाधन जिनका एक बार प्रयोग होने पर वे समाप्त हो जाते हैं, 'पुनः आपूर्तिहीन संसाधन' कहलाते हैं। इन संसाधनों के निर्माण में कई वर्ष लग जाते हैं। उदाहरण के लिए कोयला, पेट्रोलियम आदि।
3. बारम्बार प्रयोग वाले संसाधन– वे संसाधन जिनका एक बार उपयोग होने के बाद भी उनमें सुधार करके पुनः उपयोग किया जा सके, 'बारम्बार प्रयोग वाले संसाधन' कहलाते हैं। उदाहरण के लिए लोहा, ताँबा आदि धातुएँ।
4. सनातन प्राकृतिक संसाधन– वे संसाधन जो उपयोग होने पर नष्ट नहीं होते, 'सनातन प्राकृतिक संसाधन' कहलाते हैं। उदाहरण के लिए जल, वायु, सौर ऊर्जा आदि।

On the basis of replenishment, resources can be classified into the following parts–
1. Replenishable Resources– Those resources which have beneficial properties even when used, are called 'replenishable resources'. That is, those resources which can be used many times are called 'replenishable resources'. For example, once cultivated land can be made cultivable again.
2. Resupply Resources– Resources which are exhausted once they are used are called 're-supply resources'. These resources take many years to build up. For example coal, petroleum etc.
3. Frequently Used Resources– Those resources which can be improved and reused even after being used once, are called 'repeatedly used resources'. For example metals like iron, copper etc.
4. Eternal Natural Resources– Those resources which do not get destroyed when used, are called 'Eternal Natural Resources'. For example water, wind, solar energy etc.

भूगोल के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़ें। (Also read these 👇 episodes of Geography.)
1. संसाधन किसे कहते हैं? | संसाधनों के प्रकार || Who Are The Resources?
2. जैव और अजैव संसाधन | Biotic And Abiotic Resources
3. नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन | Renewable And Non-Renewable Resources



I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfcompetiton.com

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